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सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। वह शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर अनशन कर रहे थे। अस्पताल ने उनकी हालत स्थिर बताई है, लेकिन डॉक्टरों ने लगातार निगरानी और चिकित्सा देखभाल की जरूरत बताई है।
नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज दिल्ली के जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वह पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और कथित परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर अनशन कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद प्रशासन और चिकित्सा टीम ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत को स्थिर बताया है, लेकिन लगातार निगरानी की जरूरत कही है।
यह मामला आज देशभर में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। सोनम वांगचुक लंबे समय से सामाजिक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। इस बार उनका आंदोलन कथित परीक्षा गड़बड़ी, छात्रों की चिंता और शिक्षा व्यवस्था में भरोसे की मांग से जुड़ा बताया जा रहा है। जंतर-मंतर पर उनके समर्थन में कई लोग जुटे थे और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से फैल रहा था।
रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा हस्तक्षेप की बात कही थी। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने चिकित्सा सलाह के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया।
सफदरजंग अस्पताल की ओर से मिली जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन लंबे समय तक भोजन न लेने और कमजोरी के कारण डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल ने चिकित्सा देखभाल को जरूरी बताया है। उनके परिवार और समर्थकों ने उपचार की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की है और यह भी कहा है कि उन्हें पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर से हटाए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देखा है। दूसरी ओर प्रशासन का रुख है कि किसी भी प्रदर्शनकारी की स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और गंभीर स्थिति बनने से पहले चिकित्सा देखभाल जरूरी थी।
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही और छात्रों से जुड़े मुद्दों को फिर राष्ट्रीय चर्चा में ले आया है। पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं में चिंता बढ़ी है। ऐसे में यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य या जंतर-मंतर की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा, भरोसा और शासन की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बन गया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति कैसी रहती है, सरकार और प्रशासन आंदोलन से जुड़े सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या प्रदर्शनकारी आगे भी अपना अभियान जारी रखते हैं। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता वांगचुक का स्वास्थ्य और पूरे मामले में पारदर्शिता बनी हुई है।
