राजनीति
पंजाब में महिलाओं की नकद सहायता योजना पर सियासी घमासान, विपक्ष ने समय पर उठाए सवाल
पंजाब सरकार की महिलाओं के लिए नकद सहायता योजना पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा ने आरोप लगाया है कि 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले योजना शुरू करना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
चंडीगढ़, 2 जुलाई 2026: पंजाब में महिलाओं की नकद सहायता योजना को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ शुरू की है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके समय और वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने यह योजना 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले इसलिए शुरू की है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके।
विपक्ष का कहना है कि यह योजना 2022 में किए गए वादे का हिस्सा थी, लेकिन सरकार ने इसे लागू करने में लंबी देरी की। कांग्रेस ने योजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि सरकार के पास पर्याप्त धन है, तो कर्मचारियों के लंबित भत्ते और अन्य भुगतान पहले क्यों नहीं किए गए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि महिलाओं को पूरे कार्यकाल की जगह अब केवल सीमित राशि देकर सरकार राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि यदि 2022 से वादा लागू किया जाता, तो महिलाओं को काफी अधिक राशि मिलनी चाहिए थी। नेता प्रतिपक्ष ने हर पात्र महिला को बकाया राशि देने की मांग की है। शिरोमणि अकाली दल ने भी सरकार पर वादा पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं के खाते में पिछली अवधि की राशि जमा की जानी चाहिए। भाजपा ने भी इसे चुनावी अभ्यास बताया और कहा कि योजना को चुनावी माहौल बनने से ठीक पहले लागू करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
यह मुद्दा केवल एक कल्याणकारी योजना तक सीमित नहीं है। पंजाब की राजनीति में महिलाओं, किसानों, कर्मचारियों, युवाओं और सामाजिक समूहों से जुड़े वादे हमेशा चुनावी विमर्श का बड़ा हिस्सा रहे हैं। यदि सरकार योजना को सफल तरीके से लागू करती है, तो उसे राजनीतिक लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि भुगतान, पात्रता या बजट को लेकर दिक्कत आती है, तो विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकता है।
आम आदमी पार्टी सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे यह साबित करना होगा कि योजना केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक सहायता कार्यक्रम है। दूसरी तरफ उसे यह भी दिखाना होगा कि राज्य की वित्तीय स्थिति इस योजना को लंबे समय तक चला सकती है। आने वाले महीनों में यह योजना पंजाब की राजनीति के सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन सकती है।
