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भारत में व्हाट्सऐप की उपयोगकर्ता नाम सुविधा पर रोक, सरकार ने मेटा से जवाब मांगा
केंद्र सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप को निर्देश दिया है कि वह अपनी प्रस्तावित उपयोगकर्ता नाम सुविधा को भारत में फिलहाल लागू न करे। सरकार ने धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और लोगों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए कंपनी से तीन दिन में जवाब मांगा है।
नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026: भारत में व्हाट्सऐप की प्रस्तावित उपयोगकर्ता नाम सुविधा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मेटा से कहा है कि वह इस सुविधा को भारत में तब तक लागू न करे, जब तक इस पर जरूरी बातचीत और समीक्षा पूरी नहीं हो जाती। जानकारी के अनुसार सरकार ने कंपनी से तीन दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा है। यह सुविधा लोगों को मोबाइल नंबर साझा किए बिना उपयोगकर्ता नाम के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ने का विकल्प दे सकती है।
यह मामला केवल एक नई तकनीकी सुविधा का नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की गोपनीयता, सुरक्षा और भरोसे से जुड़ा हुआ है। भारत में व्हाट्सऐप का इस्तेमाल परिवारों, कारोबारियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, संस्थाओं, सरकारी सेवाओं और आम नागरिकों द्वारा बड़े स्तर पर किया जाता है। ऐसे में इस मंच पर कोई भी बड़ा बदलाव सीधे आम लोगों के डिजिटल जीवन को प्रभावित कर सकता है।
सरकार की मुख्य चिंता यह है कि उपयोगकर्ता नाम आधारित व्यवस्था का गलत इस्तेमाल फर्जी पहचान और धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। अभी व्हाट्सऐप पर व्यक्ति की पहचान मुख्य रूप से मोबाइल नंबर से जुड़ी होती है। हालांकि मोबाइल नंबर भी धोखाधड़ी को पूरी तरह नहीं रोकता, लेकिन यह पहचान का एक शुरुआती आधार देता है। अगर कोई व्यक्ति केवल उपयोगकर्ता नाम से सामने आएगा, तो ठग किसी बैंक, कंपनी, अधिकारी, प्रसिद्ध व्यक्ति, संस्था या परिचित जैसे नाम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।
इस सुविधा का एक सकारात्मक पक्ष भी है। कई लोग अपना निजी मोबाइल नंबर अनजान लोगों, बड़े समूहों या सार्वजनिक जगहों पर साझा नहीं करना चाहते। उपयोगकर्ता नाम की सुविधा आने से लोग बिना नंबर दिखाए बातचीत कर सकते हैं। इससे छोटे कारोबारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, रचनाकारों और सार्वजनिक रूप से सक्रिय लोगों को सुविधा मिल सकती है। लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गोपनीयता बढ़ाने वाली यह सुविधा लोगों की सुरक्षा को कमजोर न कर दे।
सरकार जानना चाहती है कि मेटा फर्जी नामों, मिलते-जुलते नामों, गलत पहचान और धोखाधड़ी को रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाएगा। अगर कोई ठग किसी भरोसेमंद नाम जैसा उपयोगकर्ता नाम बनाता है, तो आम लोग जल्दी में उसे असली मान सकते हैं। ऐसे मामलों में पैसे मांगने, निजी जानकारी लेने, गलत कड़ी भेजने या बैंक से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश हो सकती है। इसलिए सरकार पहले कंपनी से साफ जवाब चाहती है।
आम लोगों को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सुविधा भारत में समीक्षा के दायरे में है। फिर भी लोगों को किसी भी अनजान संदेश, नए नाम, बदले हुए संपर्क या पैसे मांगने वाले संदेश से सावधान रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल नाम देखकर स्वीकार नहीं करनी चाहिए। अगर कोई परिचित बनकर पैसे या निजी जानकारी मांगे, तो पहले सीधे फोन करके पुष्टि करनी चाहिए।
केंद्र सरकार का यह कदम दिखाता है कि भारत में डिजिटल सुविधाओं को लेकर सुरक्षा और जवाबदेही को गंभीरता से देखा जा रहा है। व्हाट्सऐप की उपयोगकर्ता नाम सुविधा गोपनीयता के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसके साथ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है। अब आगे यह देखना होगा कि मेटा सरकार को क्या जवाब देता है और भारत में यह सुविधा कब और किन शर्तों के साथ लागू होती है।
