टेक्नोलॉजी
भारत के आईटी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाली नौकरियों की मांग बढ़ी, कुल भर्ती में नरमी
भारत के आईटी क्षेत्र में कुल भर्ती धीमी पड़ने के बावजूद कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जून में एआई से संबंधित भर्ती 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कुल आईटी भर्ती में 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026: भारत के तकनीक क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में भारतीय आईटी क्षेत्र में कुल भर्ती धीमी पड़ी, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी नौकरियों की मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। यह संकेत है कि कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की तुलना में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, स्वचालन और डेटा आधारित तकनीकों पर अधिक ध्यान दे रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में भारत के आईटी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी भर्ती सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कुल आईटी भर्ती में 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह अंतर बताता है कि तकनीक कंपनियां सामान्य भर्ती में सावधानी बरत रही हैं, लेकिन एआई कौशल रखने वाले लोगों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं। नौकरी पोर्टल नौकरी की रिपोर्ट 1,50,000 से अधिक कंपनियों के डेटा पर आधारित बताई गई है, इसलिए इसे रोजगार बाजार के बदलते रुझान का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत का आईटी उद्योग लंबे समय से सॉफ्टवेयर सेवाओं, आउटसोर्सिंग, तकनीकी सहायता और डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं पर आधारित रहा है। लेकिन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते उपयोग ने कंपनियों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। कई कंपनियां ऐसे पेशेवरों की तलाश कर रही हैं जो एआई मॉडल, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, स्वचालन उपकरण, एआई उत्पाद विकास और उद्यमों के लिए बुद्धिमान तकनीकी समाधान तैयार कर सकें।
इस बदलाव का असर नए और अनुभवी दोनों तरह के पेशेवरों पर पड़ सकता है। जो युवा तकनीक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए केवल पारंपरिक प्रोग्रामिंग सीखना पर्याप्त नहीं रहेगा। उन्हें डेटा, एआई उपकरण, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और समस्या समाधान की समझ भी विकसित करनी होगी। वहीं अनुभवी आईटी कर्मचारियों के लिए भी कौशल सुधार जरूरी हो सकता है, क्योंकि कंपनियां अब ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे सकती हैं जो नए एआई आधारित कामकाज में योगदान दे सकें।
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि एआई और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियां केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं रहीं। कई अन्य क्षेत्रों में भी इनकी मांग बढ़ रही है। बीमा, उपभोक्ता वस्तु, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में कंपनियां एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग बढ़ा रही हैं। इससे यह साफ होता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि कारोबार की मुख्य जरूरत बनती जा रही है।
हालांकि यह बदलाव अवसरों के साथ चुनौतियां भी लेकर आता है। कुल आईटी भर्ती में गिरावट बताती है कि उद्योग दबाव में है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, खर्च में कटौती, ग्राहकों की सावधानी और एआई के कारण पारंपरिक कामों में बदलाव से कई कंपनियां सामान्य भर्ती को धीमा कर रही हैं। ऐसे में नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास नए तकनीकी कौशल नहीं हैं।
कुल मिलाकर, जून का रोजगार रुझान यह दिखाता है कि भारत का तकनीक क्षेत्र अब नए दौर में प्रवेश कर रहा है। आईटी उद्योग में सामान्य भर्ती भले धीमी हो, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कौशल की मांग मजबूत बनी हुई है। आने वाले समय में वही पेशेवर और कंपनियां आगे बढ़ सकती हैं जो एआई को केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि वास्तविक कामकाज और उत्पादकता का हिस्सा बना पाएंगी।
